प्रश्न- सर, प्रेम और घरवालों में क्या चुने कुछ समझ नहीं आ रहा है..!
किसी को भी मत चुनिए... वेट कीजिए! दो विल्कप में से एक को चुनना हमेशा ख़तरनाक होता है... जिसको आप छोड़ेंगी वो आप से बदला लेगा...क्योंकि जो नहीं मिलता है, उसका आकर्षण हमारे मन में कई गुना बढ़ जाता है| चुनाव के पीछे संताप अपरिहार्य रूप से आ जाता है| एक भयंकर अपराध भाव पकड़ लेगा आपको| और यह भाव भीतर-ही-भीतर आपको खोखला कर देगा...| होर्से लुईस बोहर्स ने अपनी एक कविता में लिखा है,
" जो मर चुके हैं, सिर्फ वही हमारे अपने होते हैं
सिर्फ़ वही चीज़ होती है हमारी अपनी, जिसे हम खो चुके होते हैं...
हर कविता समय के साथ एक शोकगीत बन जाती है...
जिन स्वर्गों को हमने ने खो दिया, उनके सिवा कोई स्वर्ग नहीं|
(There are no paradises other than lost paradises.)"
जबतक प्रेम चॉइसलेस न बन जाए, तब तक वेट करना ही उचित है| इसीलिए मन के शांत होने का वेट कीजिए दोनों विकल्पों को आपस में लड़ने दीजिए, धीरे-धीरे दोनों आपने आप शांत हो जाएँगे, फिर उस शांति से एक बोध का जन्म होगा, उस बोध की रौशनी में जो ठीक लगे वही कीजिए| वह हमेशा ठीक होगा, उसको करके कभी अफ़सोस नहीं होगा, उसको करने के लिए ख़ुद को समझाना नहीं पड़ेगा...! कुछ सूत्र बना लीजिए जैसे- मैं नकारात्मक मनो दशा में कोई भी निर्णय नहीं लूंगी, अगर ले भी लिया तो उसको फाइनल निर्णय नहीं मानूंगी...
जैसे तलाब का पानी अगर गन्दा हो गया हो तो कुछ देर छोड़ देने पर मिट्टी अपने आप अन्दर बैठ जाता है, और पानी साफ़ हो जाता है, वैसे ही अगर आप शांत होकर मन के भावों को, बिना उनसे उलझे, देखती रहेंगी तो वे अपने आप शांत हो जाएँगे....
दूसरी बात, अगर प्रेम और घर वालों में चुनाव करना हो तो निःसंचोक होकर प्रेम का चुनाव करना चाहिए... लेकिन सवाल यह है कि 'क्या घर वालों से प्रेम नहीं है?'.... प्रेम कभी किसी व्यक्ति से नहीं होता है... वह हमेशा आपके भीतर होता है, और समय-समय पर अलग-अलग वस्तु और व्यक्ति पर प्रक्षेपित होता रहता है| अभी आपको लग रहा है 'इस व्यक्ति से प्रेम' है, कल हो सकता है यह प्रेम किसी और पर प्रक्षेपित होने लगे, तो आपको लगने लगेगा कि उस व्यक्ति से है.. कल को आपको यदि बच्चा होगा तो फिर उससे से हो जाएगा... इस का अर्थ हुआ कि प्रेम हमारे ख़ुद के भीतर है, और यह अलग-अलग समय व परिस्थिति से प्रभावित होकर अलग-अलग व्यक्ति व वस्तु पर आरोपित होता रहता है.।
प्रेम आपका स्वभाव है, कुछ भी कर के आप उसे खो नहीं सकती हैं| घरवाले और प्रेमी, यदि दोनों भी छूट जाए, तब भी आपका प्रेम आपके पास ही रहेगा| प्रेम को खोने का कोई उपाय नहीं है|

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