Sunday, 21 July 2019

मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा



“कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा”
-अहमद नदीम क़ासमी

“Planning for the future is like going fishing in a dry gulch; nothing ever works out as you wanted, so give up all your schemes and ambitions. If you have got to think about something ~ Make it the uncertainty of the hour of your death.” - The Tibetan Book of Living and Dying

'तिब्बतन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाईंग' पढ़ने के बाद मैंने फेसबुक पर विडियो रिव्यु शेयर किया था| लेकिन किसी तकनिकी खामी की वजह से वह विडियो ठीक से नहीं चल पाया| मजबूरन मुझे विडियो हटाना पड़ा| सोचा था कि कुछ दिन बाद अपने ब्लॉग (www.ikkyutalk.blogspot.com) पर तब्सिरा डाल दूंगा| लेकिन, दिल्ली आने के बाद Milan Kundera की किताब 'The Unbearable Lightness of Being' पढ़ने में ऐसा खोया कि लिखना क्या किसी भी चीज़ का होश नहीं रहा|

What is born will die, what has been gathered will be dispersed, What has been accumulated will be exhausted, what has been built up will collapse and what has been high will be brought low.” -The Tibetan Book of Living and Dying

Sogyal Rinpoche की किताब The Tibetan Book of Living and Dying (1992)' एक समयातीत किताब है| यह किताब उन सब लोगों के लिए 'must read' है, जिनको एक दिन मरना है| फिर यह फर्क नहीं पड़ता की आप किस धर्म या मजहब से ताल्लुक रखते हैं| नास्तिक, आस्तिक, अस्तित्ववादी और अज्ञेवादी सभी के लिए यह किताब समान रूप से पठनीय है| जैसे बीमार का इलाज़ दवाई है, उसी तरह मरने वालों का इलाज़ यह किताब है| आपने लोगों को यह कहते हुआ सुना होगा कि "मौत का कोई इलाज़ नहीं है", लेकिन मैं आप से कहता हूँ 'मौत का इलाज़ है' और वह इलाज है- 'तिब्बतन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाईंग'|

“This world can seem marvellously convincing until death collapses the illusion and evicts us from our hiding place.” - The Tibetan Book of Living and Dying

अगर आप एक दिन (और वह एक दिन कभी भी आ सकता है) मरने वाले हैं, तो मरने से पहले यह किताब एक बार ज़रूर पढ़ लीजिए| यह किताब मृत्यु की यात्रा पर जा रहे यात्रियों के लिए पाथेय है| बच्चन जी ने कहीं गाया है, "इस पार प्रिय तुम हो, मधु है, उस पार न जाने क्या होगा", अगर आपके मन को भी यही भय पकड़ता है, तो यह किताब न सिर्फ आपको उस पार की ठीक-ठीक ख़रब देगी, बल्कि शरीर में रहते हुए, मौत में प्रवेश करने की कला भी सिखाएगी| फिर मौत को जानने के लिए आपको सुकरात की तरह उस शुभ घड़ी का इंतजार नहीं करना होगा, जब मौत आपके दरवाज़े पर दस्तक देगा| इस किताब को बढ़ने के बाद आप ख़ुद ही रोज़ मौत के दरवाज़े पर दस्तक देने लगेंगे|
एक दिन मौत में जो घटेगा, वह प्रति दिन नींद में घटता है| नींद तो क्या वह प्रति पल घट रहा है| दो विचारों के बीच जो अन्तराल है, वह उस अन्तराल में घट रहा है| हर उच्छ्वास में घट रहा है| सिर्फ मूढ़ मौत को भविष्य में देखते हैं, ज्ञानी उसे हर पल जीवन के साथ क़दम-से-कदम मिलाकर साथ चलता हुआ देखता है|

“The gift of learning to meditate is the greatest gift you can give yourself in this life. For it is only through meditation that you can undertake the journey to discover your true nature, and so find the stability and confidence you will need to live, and die, well. Meditation is the road to enlightenment.”
यह किताब आपको वह दृष्टि देगी, जिससे आप मौत और जीवन को एक साथ देख पाएंगे| फिर आप ऐसा नहीं कहेंगे कि जीवन के एक छोड़ पर जन्म है और दूसरे छोड़ पर मृत्यु| यह भ्रांत दृष्टि है, अस्तित्व में जीवन और मौत दो विपरीत चीज़ें नहीं है| मौत एक क्षण के लिए भी जीवन से जुदा नहीं है|
जब तक हमारी दृष्टि इतनी गहरी नहीं जो जाती है कि हम जन्म में छिपे मृत्यु को देख सकें, तब तक जीवन से दुःख का नाश नहीं हो सकता है| ओशो कहते हैं, "मरघट को गाँव से बाहर बनाकर तुमने बहुत बड़ी ग़लती की हैं, मरघट गाँव के बीचो-बीच होना चाहिए| ताकि तुम्हारे जीवन में प्रति पल मौत का बोध बना रहे|" मन मौत को झुठलाने की पूरी कोशिश करता हैं| हमारे जीवन का सारा आयोजन मौत को चकमा देने का आयोजन है| लेकिन हम कितना ही क्यूँ न भाग लें, मौत से नहीं बचा जा सकता है| अपने छाया से दूर आदमी कैसे भाग सकता है?
जो जानते हैं, उनका कहना है कि भागने में ही भूल है| क्योंकि जिन्होंने भी ठहर कर मौत के आँखों में आँखें डालकर देखा है, उनका कहना है कि इस जगत में जन्म और मृत्यु से ज्यादा झूठी चीज़ और कुछ भी नहीं है| सारा धर्म मौत के आँखों में आँखे डाल देखने की कला के सिवाय और कुछ भी नहीं है| अगर मृत्यु न हो तो आदमी कभी धर्म में उत्सुक न हो| ओशो की 'मैं मृत्यु सिखाता' पढ़ने के बाद से ही मेरे जीवन में धर्म का सूत्रपात हुआ था| अंसल प्लाजा के 'ओशो गैलरी' से खरीदी हुई यह मेरी पहली किताब थी| कुछ दिन बाद मैंने इसी किताब का ऑडियो प्रवचन भी खरीदा था| प्रवचन के अंत में ओशो 'मृत्यु ध्यान' करवाते हैं, “शरीर को बिलकुल ढीला छोड़ दें, छोड़ दें, शरीर गिरता है तो गिर जाने दें, और भाव करें की आप मर रहे हैं...ख़ुद को चिता पर जलता हुआ देखें, आपने प्रियजनों को रोता हुआ देखें........” रोज रात सोने से पहले मैं वह ध्यान किया करता था|
अपने इंस्टिट्यूट में जहाँ मैं बैठता था वहां मैंने के सामने दीवार पर 'I am going to die next moment (मैं अगले क्षण मरने वाला हूँ).' लिखकर चिपका रखा था| इसस प्रयोग का मुझ पर बड़ा गहरा असर पड़ा था|

शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर घूसा लेने से आप मृत्यु से नहीं बच जाएँगे | विश्वास की नाव में बैठकर उस पार की यात्रा नहीं की जा सकती है| समय रहते तैयारी शुरूकर दीजिए| विश्वास की नाव कागज़ की नाव है, अपने अनुभव की नाव तैयार कीजिए| आइये हम सब सोगयाल रिन्पोचे की नव में बैठकर मौत के उस पार चले|
                                                                      ‘निमंत्रण’
PRACTICING AWARENESS IN DAILY LIFE


(OSHO MEDITATION CAMP)


From 31st August to 4th September.


Facilitated by Swami Dhyan Viram (Ikkyu Tzu)


Place- In Manali, Osho Neo Vipassana Meditation Center


Limited seats. Advance booking only.


For booking call at +91 8839996078


”You have more time than any age, and you are not exhausted because of the world. You are exhausted because you have lost the inner contact- because you do not know how to go deeper in your self and be revitalized.”- Osho

Always recognize the dreamlike qualities of life and reduce attachment and aversion. Practice good-heartedness toward all beings. Be loving and compassionate, no matter what others do to you. What they will do will not matter so much when you see it as a dream. The trick is to have positive intention during the dream. This is an essential point. This is true spirituality.’ - The Tibetan Book of Living and Dying


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