प्रश्न -Swami ji प्रणाम। समझ कैसे पैदा हो, बताइये कृपा करके। आपका शुल्क अदा हो जाएगा।
प्रणाम!
‘कैसे’ का जवाब विधि होगा, और अगर ‘विधि’ से कुछ हो सकता था, तो फिर ‘समझ’ की जरूरत ही क्या थी? किसी भी विधि से समझ को पैदा नहीं किया जा सकता है| हाँ, यह हो सकता है कि विधि करते-करते किसी को विधि की निरर्थकता समझ में आ जाए| विधियों की उपयोगिता बस इतनी है कि एक दिन आपको उनकी निरर्थकता समझ में आ जाए| अब समस्या यह है कि अगर बुनियाद में नासमझी हो, तो विधि करते-करते जीवन गुजर सकती है, लेकिन समझ नहीं आएगी| तो, प्रश्न यह उठता है कि विधि करने से पहले जो समझ चाहिए वह समझ कहाँ से आएगा, और कैसे पता चले कि बुनियाद में क्या है?
सबसे पहली बात तो हमें यह समझना होगा कि ‘समझ’ को किसी भी उपाय से पैदा नहीं किया जा सकता है| कम-से-कम पहली बार तो ऐसा नहीं किया जा सकता है| पहली बार जब भी ‘समझ’ किसी के जीवन में आता है, तो वह प्रयास से नहीं आता है, वह हमेशा ‘प्रसाद’ की भांति आता है| और हर एक के जीवन में ऐसे दो चार क्षण आते हैं, जब समझ की किरण उसके उपर उतरी है| आमतौर, पर लोग उस किरण का कोई उपयोग नहीं करते हैं| किरण आती है और खो जाती है|
अब, दूसरी बात हमें यह समझना होगा कि ‘विधि से समझ को सिर्फ गहराया जा सकता है, उसे पैदा नहीं किया जा सकता है|’ इसीलिए विधि हमेशा सेकंडरी है| उस रात जब सिद्धार्थ गौतम ने बीमार, बुजूर्ग, और मरे हुए को देखा, तो उनके जीवन में समझ/बोध का अवतरण हुआ, फिर उस समझ/बोध को गहराने के लिए वे जंगल गए| फिर विधि किया, और एक दिन जाना की विधि वर्थ, और उसी दिन वे निर्वाण को उपलब्ध हुए|
जो सौभाग्य का क्षण बुद्ध के जीवन में आया, वह क्षण हमारे जीवन में भी आता है| एक बार नहीं बार-बार आता है, हजार बार आता है| लेकिन हमारी मूढ़ता ऐसी है कि उसको गहराने के बजाय हम उसको भूलाने और मिटाने में लग जाते हैं| दो, अतियों के क्षण में बोध जीवन में उतरता है.. अतिशय ख़ुशी के क्षण में और अतिशय दुःख के क्षण में| और पहलीबार बोध/समझ नकार के रूप में उतरता है| जैसे, जीवन वर्थ है, सब असार है, मैं बेहोश हूँ, मैं एक दिन मर जाऊँगा..| ऐसा अक्सर तब होता है, जब हमारा कोई अति निकट संबंधी मर जाता है, प्रेम संबंध टूट जाता है, या फिर ऐसी कोई अप्रत्याशित घटना घट जाती है, जो आपको एक दम से सेण्टर से बाहर फ़ेक दे| जैसे बड़ी लाटरी लग जाना, दुर्घटना हो जाना इत्यादि-इत्यादि|
जब भी जीवन में कभी सौभाग्य का ऐसा कोई क्षण आए तब विधि के द्वारा उसको गहराने की कोशिश करनी चाहिए| तब, विधि की बहुत उपयोगिता है| अन्यथा, ऐसे ही अपनी सुविधा से, लोभाविष्ट होकर कोई भी विधि या ध्यान करने से कोई फायदा नहीं है|

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