Friday, 12 July 2019

रडिंग और traveling से मेरे गूँगेपन को शब्द मिलता है

प्रश्न- आज आप हर सवाल का जवाब और किसी भी समस्या का समाधान बता रहे हो, ऐसी समझ आपने कैसे प्राप्त की, इसके लिए क्या किया?
इक्क्यू-जितनी समस्याएँ हमें दिखती हैं, उतनी असल में है नहीं।समस्या एक ही और वह यह है कि हम ख़ुद को नहीं जानते हैं। बाँकी सभी समस्याएँ एक इसी समस्या की प्रतिछवि है। सो, यदि आप इस एक समस्या का समाधान ढूँढने निकलते हैं, तो उसी यात्रा में बाँकी सभी समस्याओं का समाधान मिल जता है।
और, ख़ुद को जनाने का जो सूत्र है वह है ‘self-study’ (स्वाध्याय), यानी अपने शरीर, विचार और भाव का चुनाव रहित अवलोकन। 

यही मैं करता हूँ , और यही मैं चाहता हूँ कि आप भी करिये। यही वह सूत्र है। 
‘सक्षित्व या स्वाध्याय’ वो चाभी है जिससे अस्तित्व के सभी राज़ खुल जाते हैं।


एक विशेष बात- अनुभव कई बार आपको गूँगा भी बना सकता है। इसीलिए, निरंतर आपको, जो आपने जाना है उसको जनाने के लिए, अभिव्यक्ति के नए-नए माध्यम तलाशते रहना चाहिए। रडिंग और traveling से मेरे गूँगेपन को शब्द मिलता है।

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