Sunday, 14 July 2019

ख़त- #3 राव साहब की शाश्वत बीमारी का सनातन इलाज

प्रिय आत्मन, 
[28 June, 2019]
कल राव साहब ने एक नई बात बताईज़ुकाम की वजह से मेरा पेट ख़राब हो गया है।  क्या ग़ज़ब की बात कही! कल से ही इस बात को सोच-सोच कर मैं सिर और दाढ़ी खुजा रहा हूँ।( मुझे इस तरह से सिर खुजाता देखदिव्या को लग रहा है कि शायद मैं डैन्ड्रफ की वजह से इतना सिर खुजा रहा हूँ। वह सुबह से मुझे चार बार डैन्ड्रफ का इलाज बता चुकी है। अब उसको क्या बताऊँ कि खुजली के इस भयंकर उत्पात का कारण डैन्ड्रफ नहीं हैयह दिमाग़ी चक्कर का असर है। ख़ैरजो चीज़ जिसके पास नहीं होउस चीज के बारे उससे बात करना मैं ठीक नहीं समझता हूँ)
पेट ख़राब का ज़ुकाम से मुझे कोई भी संबंध नहीं दिख रहा है। उनका कहना है कि,”जिस बेक्टीरिया की वजह से मुझे ज़ुकाम हुआ हैलूज़ मोशन के ज़रिए शरीर उसे बाहर फ़ेक रहा है। यह मैं पहली बार सुन रहा हूँ। उनका ज़ुकाम भी मुझे समझ नहीं आता हैन तो नाक से पानी बह रहा हैन ही तीन दिन में एक बार भी उन्होंने छींका है। इतनी ठंड में लूज़ मोशन का होना भी मुझे बड़ा असंभव-सा लगता है। इस मामले में राव साहब मुझे कोई बहुत बड़े कलाकार मालूम पड़ रहे है।
कल सुबह पानी भरते समय कहने लगेइस वीराने अब मेरा मन नहीं लग रहा हैलगता है मुझे बुख़ार हो गया है।” मैं सुनकर बड़ा हैरान हुआ। सुबह-सुबह राव साहब क्या अलबल बोल रहे हैं। मन नहीं लगने का बुख़ार से क्या संबंध है। और धर्मकोट वीरान कब से हो गया।  मुझे कुछ शक हुआ मैंने कहालाइए अपना हाथ दिखाइएदेखूँ बुख़ार है भी या आप यूँ ही माहौल बना रहे हैं। कहने लगेबुख़ार हाथ से नहीं माथा छूकर देखा जाता है। मैंने कहाठीक है माथा ही छू लेते हैं।  मैंने माथा छूकर देखाकोई बुख़ार नहीं था। कहने लगेआपको बुख़ार देखना आता ही नहीं है।  मैंने कहाबच्चूमेरे पास आपकी इस मनरोग का भी इलाज है। मैं झट अपने कमरे से थरमामीटर निकाल लाया। बुख़ार जाँचकर देखा 97.7 निकला। उनका चेहरा उतर गया। मुझे भांति-भांति का (कु)तर्क देकर यह समझाने की कोशिश करने लगे कि बुख़ार न होने के बावजूद भी उन्हें बुख़ार जैसा क्यों लग रहा है। मैंने उनसे कहादेखिए राव साहबसौ बात की एक बात अगर मास्टर उगवे जैसा अनुभवी और बुज़ुर्ग आदमी किसी को बबूचक’ बोलता हैतो ऐसे ही मुँह उठाकर कुछ भी नहीं बोल देता। कुछ आगे पीछे का सोच कर बोलता है। आज से आप मेरी नज़र में भी बबूचक’ ही हैं। मेरी बात सुनकर थोड़ी देर तक मुँह लटकाए बैठे रहेफिर उठकर अपने कमरे में चले गए। और अंदर से गेट बंद करके लड़कियों से चैट करने लगे। 
डीजी को जब राव साहब की बीमारी के बारे में लिखातो उन का जवाब आया राव साहेब की यह पुरानी बीमारी हैवह जो चाहते हैअगर वह नहीं हो पाता हैतो वह बीमार पड़ जाते है। मुझे लगता है इस बार इनकी बीमारी की वजह प्रेमिका का न मिलना है।” मुझे डीजी की बातों में थोड़ी सच्चाई नज़र आती है। अभी दो दिन पहले ही मैंने मेहुल के ख़त का जवाब देते हुए लिखा था‘कल का पूरा दिन Salvation Cafe में किताब (तिब्बतन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाइंग) पढ़ते हुए बितायासुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना वहीं खायायह कैफ़े ज़ोस्टल वाले चलाते हैखाना और कॉफ़ी दोनों बहुत सही था(सैल्वेशन कैफ़े की कॉफ़ी से याद आया। दो दिन पहलेशुक्रवार को, Joy food पर जो कॉफ़ी पी थी उसकी वजह से सुबह पाँच बजे तक सो नहीं पाया था। कुछ अलग ही तरह का कैपेचीनो पिला दिया था। ऊपर साबुन के जैसा झाग थाऔर नीचे पेंदी में एक इंच मोटा खड़ा कॉफ़ी बीन। पैसा लगा था इसीलिए जैसे-तैसे निगल गया था| वर्ना, कॉफ़ी गिलोई के जूस से कम न था)
वहां कैफ़े के काउंटर पर जो लकड़ी बैठी थीउससे बात-चीत की तो पता चला कि वह वहां वालंटियर हैदिन में ४-५ घंटा काम करना होता हैउसके बदले रहना और खाना फ्री होता है|उसी से पता चला की भारत और नेपाल को मिलाकर ज़ोस्टेल के कुल 38 ब्रांच हैं (नेपाल में दो ब्रांच है, एक काठमांडू और दूसरा पोखरा में। धर्मकोट के अलावा Zostel का दूसरा ब्रांच हमने खजुराहो में देखा था)वह लड़की दिल्ली से थीकमला नेहरु कॉलेज से दर्शनशास्त्र में स्नातक करके यहाँ थोड़ा समय बिताने आई हैहमेशा की तरह इस बार भी राव साहब को कल उससे एकतरफ़ा प्यार हो गयाअब परसों से वे उसके चक्कर में ज़ोस्टल में रहने जा रहे हैं| ” लेकिन अफ़सोसअपनी अनोखी बीमारी की वजह से शायाद अब उनका जोस्टल जाना संभव नहीं हो पाएगा। 

पुनश्च- आज सुबह राव साहब को तिब्बतन हॉस्पिटल ‘DELEK’ ले गया था| खून और स्टूल जांच करके डॉक्टर ने बता कि कुछ गड़बड़ खा लेने की वजह से पेट में इन्फेक्शन हो गया है| उम्मीद है, कल तक ठीक हो जाएँगे, और शुक्रवार को Zostel जा पाएँगे|
आज जब मास्टर उगवे को राव साहब की बीमारी के बारे में बताया तो उनका कमेंट आया, “राव एक नंबर का ढकोसलाबाज़ है, कोई तबियत ख़राब नहीं है इसकी... प्रेम नहीं मिलने के कारण यह बौरा गया है|”

पुनश्च- अभी-अभी डीजी का मेल आया है, “राव साहेब से जब मैंने कल वीडियो कॉल पर बात की तो उनके हाथ में मैंने ORS के दो पाउच देखे। उससे मुझे अंदाजा आया की शायद उनको दस्त हो गए है।पर तुरंत मुझे आभास हुआ की मेडिकल साईन्स भले ही इसे दस्त लगना कहती होपर मेरे ख़याल में वह दस्त नहीं हैबल्किप्रेमिका के अभाव में जो स्ख(beep).. आगे से नहीं हो पाया और दमित रह गयावही reservior के उन्माद ने अपना निकलने का कोई और ही मार्ग खोज लिया। ख़ैरहकीकत क्या हैवह तो राव साहेब जाने।“

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