इस संसार को मैंने जैसा पाया है, जाते-जाते इसे उससे थोड़ा और सुंदर करके जाना चाहता हूँ| इस प्रयास में कुछ चीजें जो मैं कर रहा हूँ, उसकी जानकारी आपको देना चाहता हूँ...शायद आपके किसी काम आजाए...!
1. जनसंख्या वृद्धि में मैं किसी भी प्रकार का कोई सहयोग नहीं कर रहा हूँ| मेरा ऐसा मानना है कि अगले बीस साल तक इस दुनिया में एक भी बच्चा पैदा नहीं होना चाहिए| जार्ज गुरजिएफ ने पाप की परिभाषा देते हुए कहा है, "ज़रूरत से ज्यादा कुछ भी पाप है"| इस हिसाब से आज 'बच्चा पैदा करने से बड़ा पाप और कोई भी नहीं है'| विश्व की जनसंख्या 1 अरब से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और अभी यह संख्या 10 अरब के क़रीब है|
नोट- सब के माँ-बाप की तरह मेरे माता-पिता की भी यह ख्वाहिश है कि वे मरने से पहले अपने पोते/पोती का मुंह देख लें, लेकिन विश्व हित का ध्यान रखते हुए मैं उनकी यह ख्वाहिश कभी पूरा नहीं करूँगा|
2. जनसंख्या के बाद जो सबसे अहम् चीज़ है, वह है 'पर्यावरण'| कहीं आने-जाने के लिए मैं 'साइकल' या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करता हूँ| मेरे घर में न तो AC है, न ही टीवी, फ्रिज़, और वाशिंग मशीन है| साल के किसी भी महीने में मेरा बिजली बिल 300 से ज्यादा नहीं आता है|
3. सरकार ने आज प्लास्टिक बंद किया है, लेकिन मैं पिछले 4 साल से घर से छोला लेकर सामान खरीदने जाता हूँ|
4. फिलहाल मैं किराये के मकान में रह रहा हूँ, और संभवतः हमेशा किराए के मकान में ही रहूँगा| लेकिन यदि कभी अपना घर बनाया, तो मेरा घर आम के पेड़ से ऊँचा नहीं होगा| मेरे घर में टाइल्स नहीं होगा, अनावश्यक लकड़ी का फर्नीचर नहीं होगा| अभी जिस घर में रह रहा हूँ, उसमे भी फर्नीचर के नाम पर चार कुर्सियां हैं बस| जमीन पर चटाई बिछा कर सोता हूँ|
5. पिछले दो साल से मैंने कपड़े की ख़रीदारी क़रीब-क़रीब बंद कर दिया है| एक जींस बनाने में हजारों लीटर पानी लगता है| जल्द ही मेरे पास सिर्फ दो जोड़ी कपड़े होंगे, जब तक फट नहीं जाता दूसरा नहीं लूँगा|
6. पिछले तीन साल से वृक्षारोपण कर रहा हूँ| पिछले साल ख़ुद के पैसे से हमने अपने शहर में कोई 100 पेड़ लगाए थे| इस साल भी इस दिशा में प्रयास जारी है| 'i do my bit' के नाम से पिछले दो साल से हम वृक्षारोपण अभियान में सक्रीय हैं|
7. मेरी आर्थिक स्थिति बहुत ही अच्छी है, 30 से 50 हज़ार रूपया हर महीने घर बैठे-बैठे बड़े आराम से कमा लेता हूँ| (जिस शहर में मैं रहता हूँ वहां के लिए तीस हजार रुपया बहुत होता है, जैसा घर आपको यहाँ 4 हजार में मिल जाता है, वैसा आपको दिल्ली मुंबई में 2 लाख में भी नहीं मिलेगा) एसी, कार, टीवी, फ्रिज, बाइक, और वाशिंग मशीन सब अफ़्फोर्ड कर सकता हूँ| लेकिन अपनी कमाई का 70% मैं किताब और घूमने में खर्च करता हूँ| सेविंग क़रीब-क़रीब जीरो है.. सेविंग के नाम पर हर महीने 5 हज़ार बचाता हूँ| साल के अंत में जब ६०००० इकठ्ठा जो जाता है, तब एक लंबी छुट्टी पर निकल जाता हूँ| एकाध महीने में साकिम बन कर लौट आता है| कोई LIC नहीं है, मेडिकल इंश्योरेंस नहीं है| यह सब आपको इसलिए बताया ताकि आप यह समझ सकें कि 'इक्कट्ठा करने की प्रवृति' और जरूरत से ज्यादा कमाना पाप है| आपको शायद इल्म नहीं होगा कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में आप कितने लोगों को भूखे मार रहे हैं|
9. उपवास नहीं करता हूँ, लेकिन पहले जितना खाता था, अब उसके आधे से भी कम खाता हूँ| उम्मीद करता हूँ कि जितना अन्न मैं बचा रहा हूँ, उससे किसी का पेट भर रहा होगा|
10. यह मेरा अजीब सा नाम इस बात का सूचक है कि मैं जाति, धर्म और क्षेत्रवाद की सीमाओं से खुद को तोड़ देना चाहता हूँ| मेरा नाम से न तो आप मेरे जाति का पता लगा सकते हैं, और न ही मेरे धर्म का|
11- अंतिम बात- अपनी जीवन संगनी का चुनाव मैंने अपनी मर्ज़ी से किया था| और मेरी मर्ज़ी जाति, धर्म, क्षेत्र, देश और दहेज की लोभ से मुक्त थी|
नोट- यहाँ भी मेरे पिताजी और माँ की इच्छा थी कि मैं उस्न्की मर्जी से 'शरीक-ए-हयात' का चुनाव करूँ, वे भी चाहते थे कि उनको दहेज़ मिले| मैं एक ऐसे खानदान से ताल्लुक रखता हूँ जहाँ मुर्ख और पढ़े लिखे सब समान है| मैंने अपने खानदान के डॉक्टर, इंजीनियर,CA, BA MBA, गवर्नमेंट जॉब वाले, प्राइवेट जॉब वाले, भैस चराने वाले और अनपढ़-मुर्ख सबको दहेज लेकर शादी करते हुए देखा है| ऐसे में बिना दहेज़ लिए और अपनी मर्ज़ी से 'पार्टनर' का चुनाव करना मेरे लिए कतई आसान नहीं था|

Good...
ReplyDeleteशुक्रिया... :)
DeleteGood
ReplyDeleteबहुत अच्छा
Deleteशुक्रिया !
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