अर्थ(धन) की दृष्टि से मनुष्य के तीन प्रकार हैं-
अमीर- अमीरी का कोई भी संबंध इस बात से नहीं है कि आपके पास कितना है| अमीरी का संबंध खर्च करने की क्षमता से है| अगर आप महीने में एक लाख कमाते हैं, और पूरा का पूरा खर्च कर देते हैं, कल के लिए कुछ भी बचा कर नहीं रखते हैं,तो आप अमीर है| आमतौर पर धन के बढ़ने के साथ ही लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो जाती है.. मतलब जैसे-जैसे धन बढ़ता है, वैसे-वैसे धन को खर्च करने की क्षमता कम होने लगती है| अमीर कल की चिंता नहीं करता है, उसकी आमदनी और खर्च दोनों सम्यक होता है, एक सामंजस्य होता है| वह जितना कमाता है, उतना खर्च कर देता है.. कल के लिए कुछ भी बचा कर नहीं रखता है| अगर वह पाता है, उसे आज जितने की जरूरत है, उससे ज्यादा उसके पास है, तो वह अपने अतिरिक्त धन को उन लोगों में बाँट देता है, जिनके पास नहीं है| कल के लिखे वह कुछ भी बचा कर नहीं रखता है|
"आई मौज फकीर की , दिया झोपड़ा फूंक"
गरीब- गरीब वह इंसान होता है- जिसकी खर्च करने की क्षमता क़रीब-क़रीब खत्म हो चुकी है| गरीब आदमी अगर एक लाख रुपया कमेगा, तो वह दस हज़ार खर्च करेगा और 90 हज़ार बचा कर रख लेगा| इन्हीं लोगों की वजह से दुनियां में हजारों लोग भूखे मर रहे हैं| लाखों लोगों के आज को बर्बाद करके गरीब अपने कल को सुरक्षित रखते हैं|
"धन इकठ्ठा करना पाप है| आज अगर आपके पास ज़रूरत से ज्यादा है, तो उसे कल के लिए मत बचाइये, उन लोगों में बाँट दीजिए, जो आज भूखें हैं|"
मंदबुद्धि- ये वे लोग हैं जो एक लाख कमाते हैं, और सवा लाख खर्च करते हैं| मतलब 25 हज़ार का कर्जा कर लेते हैं| जितना नुकसान गरीब समाज को पहुंचता है, उतना ही ये लोग भी पहुंचाते हैं| इसीलिए कभी किसी को कर्ज न दें, कर्ज देना और लेना दोनों पाप है| अगर आपके पास अधिक हैं तो उनके साथ शेयर करें जिनके पास नहीं है... कर्ज देकर कभी किसी की मदद न करें.. अमीर आदमी न तो कभी किसी से कर्ज लेता है, और न ही कभी किसी को कर्ज देता है...! वह सिर्फ बांटना जानता है.. सिर्फ गरीब लोग कर्ज देते हैं... और मंदबुद्धि कर्ज लेते हैं...

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