मैं किसी भी सवाल का जवाब नहीं हूँ| लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं, "तुम क्या हो?", और मैं बगले झाँकने लगता हूँ| घर से जब आईना देखकर निकलता था, तो वही था जिसे लोग 'आदमी, इन्सान, और मनुष्य' कहते हैं| पता नहीं पूछने वाले महानुभाव को इसका पता कैसे नहीं चलता है| फिर कुछ लोग पूछते हैं, "तुम क्या करते हो?", तो मैं एकदम से बिदक जाता हूँ| क्या बोलूं की मैं क्या करता हूँ| यदि सच बोलता हूँ कि 'मैं कुछ भी नहीं करता हूँ', तो सामने वाले को यकीन नहीं होता है| और यदि झूठ बोलता हूँ, तो मुझे अच्छा नहीं लगता है|
गए साल अपनी बुआ से मिलने राजस्थान गया था, वो कहने लगीं, "सब पूछते रहते हैं कि आपका भतीजा क्या करता है, मुझे तो ख़ुद ही पता नहीं की तुम क्या करते हो, अब क्या बोलूं में लोगों को, क्या करते हो तुम?" मुझे कुछ समझ ही नहीं आया कि मैं उनसे क्या बोलूं| 'बौआता(भटकता) रहता हूँ, इधर-से-उधर, और तो कुछ करता नहीं', मैंने ने उनसे कहा| "इतना घूमने के लिए पैसा कहाँ से लाते हो?", बुआ बोली| 'ढक-पेंच से कमा लेता हूँ, या कह लो की GD करता हूँ', मैंने उनसे कहा| "ई जीडी क्या होता है?", मुंह बनाते हुए बुआ बोली| 'जीडी माने गोरख धंधा, यही करता हूँ मैं', मैंने उनसे कहा| "तुम्हारे बाप का भी कभी किसी को पता नहीं चला कि क्या करता है, और तुम्हारा भी वही हाल है..असल बेटे हो तुम'', चाय का कप उठाकर जाते हुए बुला बोली|
उस दिन के बाद से अब जब भी कोई मुझसे मेरे कमाने का राज़ पूछता है तो जीडी कह देता हूँ| लेकिन मैं ख़ुद नहीं जानता कि ये जीडी क्या है, और मैं क्या करता हूँ| मैं बस इतना जानता हूँ कि कुछ-से-कुछ करता रहता हूँ, और उसके परिणाम स्वरूप कुछ-का-कुछ होता रहता है| या फिर इसको ऐसे कह सकता हूँ, 'करता-धरता कुछ भी नहीं हूँ, लेकिन होता बहुत कुछ रहता है'| 'तुम क्या करते हो के बजाय यदि मुझसे ये पूछा जाए कि तुम्हारे जीवन में क्या-क्या होता रहता है', तो बड़ी सहजता से बहुत कुछ बता सकता हूँ|
मैं अपने जीवन में करता कुछ भी नहीं हूँ, और न ही मैं कुछ हूँ| जैसे सबके जीवन में होता है, वैसे ही मेरे जीवन में भी बहुत कुछ होता रहता है| और मेरे जीवन में शुरू से ही सब कुछ ऐसे ही है| मैंने जन्म लिया नहीं था, मेरा जन्म हुआ था, और जैसे अपने आप एक दिन जन्म हुआ था, वैसे ही बड़ा हो गया, और एक दिन ऐसे ही मर भी जाऊँगा| सब अपने आप हो रहा है| इसमें मैं कुछ कर नहीं रहा हूँ| इसीलिए 'करने' की बात उठा कर आप मुझे बड़ी असुविधा में डाल देते हैं|
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