Thursday, 5 September 2019

नागफनी पर पीला फूल आया था


26-Aug,2016
अगर पांच मिनट और इंतजार करता तो आज किरण बेदी जी से मिलना हो जाता है, और उनके साथ एक फोटों भी खिच जाती | अगर फोटो को शेयर करता, निःसंदेह आम तस्वीरों की तुलना में उस तस्वीर पर लोगों के ज्यादा लाइक और कमेंट आ जाते| लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया| एन वक़्त पर जब किरण बेदी जी अपने मीटिंग से निकल कर आने ही वाली थीं, हम राज निवास से निकल कर बाहर आ गए| दिव्या इस बात से थोड़ी नाराज़ भी हुई उसे उनसे मिलकर तस्वीर बनवाने का बड़ा मन था| लेकिन मैं अपने वायदे से मजबूर था| उस दिन चाय पर जब हम (पी.डी ओस्पेंसकी, गुर्जेइफ़ और मैं) चर्चा कर रहे थे, तब G. ने मुझसे तीन वचन लिए थे, उसमे से एक वचन एक यह भी था कि मैं जीवन में कभी किसी फेमस व्यक्ति के साथ तस्वीर नहीं खिचवाउंगा| 
राज निवास में जाने के लिए आपको एक दिन पहले बुकिंग कराना होता है| यह बुकिंग ऑनलाइन होता है| फिर आपको अगले दिन 12:00 से 1:00 के बीच में बुलाया जाता है| 'राज निवास', 'पुदुच्चेरी संग्रहालय' के बगल में ही है| अंदर जाने पर एक उदास और जीवन से एकदम थकी हुई स्त्री आपको अंदर घुमाने ले जाती है| दिवार पर लगे कुछ पेंटिंग, फ़्रेच फर्नीचर, डाइनिंग हॉल, मीटिंग हॉल और एक सौ पचास साल पुराना पियानो और फर्श दिखाने के बाद वो आपको एक मंदिर में ले जाती है| मंदिर के बाहर खड़ा एक व्यक्ति जो कहीं से भी पंडित और भक्त टाइप नहीं दिखता है, आपको मंदिर के पास बुला कर एक कपूर जला कर भगवान् की आरती करता है, और फिर आरती का दिया आपके सामने लाकर आपसे कुछ पैसे पाने की उम्मीद करता है| इसी उम्मीद में वह आपके माथे पर तिलक भी लगा देता है| फ्रेंच स्टाइल में बना भवन सुन्दर और भव्य है| मेन हॉल में उस सब गवर्नर की तस्वीर लगी है, जो किरण बेदी से पहले वहां रह चुके हैं| बहुत से तस्वीरों में एक तस्वीर 'एन.एन झा' की थी| मैं खुश हुआ कि यहाँ अपने मिथिलांचल के भी कोई रह चुके हैं| 
डाइनिंग हॉल के टेबल पर एक विशाल कॉफ़ी कप रखा हुआ था, कप इतना बड़ा था कि एक छोटा बच्चा उसमे बैठ कर नाहा ले, "क्या मैडम इसमें कॉफ़ी पीती हैं", मैंने जीवन से उदास महिला से पूछा| जवाब देने के बजाय उसने कप में सामने हमें खड़ा करके अपने मोबाइल से एक फोटो लेकर हमारे व्हात्सप्प पर भेज दिया| 
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कल सुबह शमशान के पास वाले ओरोविल बीच पर सूर्योदय देखने गया था| हमसे पहले कई लोग बीच पर मौजूद थे| संभवतः हर कोई दिनकर को अरग देने ही आए थे| एक दम्पत्ति जो थर्मस में चाय भर कर लाए थे, शानदार कप में चाय का मजा ले रहे थे| उनकी ठाठ देखकर थोड़ी इर्ष्या भी हुई| 
मौसम सुहाना था, लोग कम थे, तीन कुत्ते रेत पर मस्ती कर रहे थे, नागफनी पर पीला फूल आया था|
छः बजकर तीस मिनट तक हमने इंतजार किया, लेकिन सूर्य महाराज बादलों की ओट से प्रगट नहीं हुए| अंत में निराश होकर हम लौट आए| हालाँकि सुबह इतनी सुन्दर थी कि सूरज को उगता हुआ न देख पाने का मलाल ज्यादा देर तक नहीं रहा|

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