#सन्यास -9
जब मैं बहुत छोटा था, संभवत: 8 या 9 वर्ष का रहा होऊँगा, तब अपने एक चाचा, जिनका नाम मोहन झा है, से सुना था कि रजनीश एक बहुत बड़ा माफ़िया था। यह पहला मौक़ा था जब मैंने किसी के मुँह से ओशो का नाम सुना था। यह बात मुझे क्यों याद रह गई, यह बड़े हैरानी की बात है। क्योंकि किस संदर्भ में यह बात उन्होंने कही थी यह मुझे बिलकुल भी याद नहीं है। मैं ऐसा मानता हूँ कि शायद ‘माफ़िया’ शब्द के आकर्षण की वजह से यह बात मुझे याद रह गई।
फिर सन 2000 में, मैं अपने एक दोस्त, जिसका नाम गोविंद है और लोग उसे गोविंदा या गोविंदजी बुलाते हैं, के यहाँ बैठकर किताबें पढ़ा करता था। उसके पास बहुत सी किताबें थीं। मैं उन में से चुन-चुनकर पढ़ता रहता था। उन्हीं किताबों में मुझे एक दिन एक ऐसी किताब हाथ लगी जिसके शुरू और अंत के कुछ पृष्ठ ग़ायब थे। हर पृष्ठ के नीचे किताब का नाम लिखा था ‘संभोग से समाधि की ओर’ नाम देखते ही मैंने झट-से किताब जेब में रख ली।
घर आकर जब किताब पढ़ा तो बड़ी निराशा हुई। संभोग के बारे कुछ लिखा ही नहीं था। बस एक जहग यह लिखा था कि अगर कोई सात घंटे तक लगातार संभोग कर ले, किस ढंग से करना है उसकी विधि बताई हुई थी, तो फिर वह सदा के लिए संभोग से मुक्त हो जाएगा। बस यह एक बात मुझे रोचक लगी थी, बाँकि किताब में जो बातें लिखी थी वो मेरे सिर के ऊपर से चला गया। लेकिन किताब के लेखक का नाम जानने की इच्छा मन में घर कर गयी। पर किताब का नाम ऐसा था कि किसी से उसके बारे में पूछ भी नहीं सकता था।
फिर 2001 में जब मैं दसवीं में आया तो ट्यूशन पढ़ने के लिए अपने गाँव से चार किलोमीटर दूर एक दूसरे गाँव ‘भरवाड़ा’ जाने लगा। टीचर का नाम गुनानंद जी था आप मेरे ननिहाल ‘कटका’ निवासी थे। बिहार के प्रसिद्ध विदूषक गोनु झा की समाधि पर हमारी क्लास लगती थी। अपने गाँव से हम चार लोग, प्रेम ठाकुर, अमित झा, भैरव झा, सुमित झा और मैं, वहाँ पढ़ने जाते थे।
दिवाली के नज़दीक जिस भवन में हमारी क्लास लगती थी उसकी सफ़ाई होनी थी। सो, कुछ दिनों के लिए क्लास की जगह शिफ़्ट कर दी गई। नई जगह पूरानी जगह के ठीक सामने रोड के उस तरफ़, लेकिन रोड से काफ़ी ऊँचाई पर थी।
एक दिन एक लंबे घुंघराले बाल और बड़ी दाढ़ी वाला व्यक्ति नीचे रोड से गुज़र रहा था। इस व्यक्ति को मैं जानता था, ये मेरे पिता के मित्र थे। उनको जाता देख मेरे क्लास की एक लड़की ने गुनानंद जी से पूछा, “सर, इसके बाल-दाढ़ी इतने लंबे क्यों हैं?” गुनानंद जी ने बड़ी आत्मीयता के साथ उसके कान के पास अपना मुँह लाकर क़रीब-क़रीब फुसफुसाते हुए कहा, “यह रजनीश का चेला है। रजनीश लड़की और ड्रग्स का धंधा करता था।”
यह मेरा ओशो से दूसरा परिचय था। पहला- रजनीश एक बहुत बड़ा माफ़िया था, और दूसरा- रजनीश लड़की और ड्रग्स का धंधा करता था।

No comments:
Post a Comment