Tuesday, 22 May 2018

'मिसेज फनीबोन्स' (विवेचन)

किताब का नाम- मिसेज फनीबोन्स, लेखक- ट्विंकल खन्ना 

       "Life is full of contradictions. We Crave security and independence in equal measures." 

किताब से संबंधित कुछ तथ्यों पर एक नज़र डालें:-
1. पेंगुइन प्रकाशन से छपी, 235 पृष्ट की इस किताब का मूल्य 299 रुपया है|
2. पूरी किताब को एक बैठक यानि तीन घंटे में समाप्त किया जा सकता है| (इस बात से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि प्रति पृष्ट 1.11 पैसे की कीमत वाली इस किताब में क्या लिखा होगा|)
3. 2016 में इस किताब को ‘रेमंड क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है, और यह ‘ए नेशनल बेस्टसेलर’ है|
4. लेखिका, प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना की सुपुत्री, और अक्षय कुमार की पत्नी हैं|
5. किताब पढ़ने के बाद निर्देशक करन जोहर ने कहा कि I love Twinkle Khanna’s brilliant observations and self-deprecating humor- she is the discovery of the decade.”

अब, किताब से संबंधित कुछ सत्यों पर एक नज़र डालें:-
1.      यह किताब अभिनेता अक्षय कुमार के प्रसंशकों को ध्यान में लिख कर लिखी गई, है, अर्थात उन्हें बहुत पसंद आएगी|
2.      यह किताब उन लोगो के लिए है, जनके पास अफ़रात फ़ालतू का पैसा, और फ़ालतू का समय है
3.      पूरे किताब में मुश्किल से तीन बार आपको हंसी आएगी|

अब विवेचन:-
किताब में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिस के बारे में बात की जाए, या फिर जिसकी वजह से किताब पढ़ी जाए| लेकिन फिर भी मैं आपसे निवेदन करूँगा कि एक बार आप इस किताब को जरूर पढ़िए| क्योंकि बिना पढ़े आप यह कैसे जानेंगे कि बिना सिर-पैर की किताबें कैसी होती है? सार को सार की भांति समझने के लिए असार का ज्ञान होना जरूरी है|

बाबा तुलसीदास ने ठीक कहा है कि ‘समरथ को नहीं दोष गुसाईं'| पैसे के दम पर, कैसे लोगों को उल्लू बनाया जाता है, और कैसे लोग उल्लू बन जाते हैं, मैं यह देख कर हैरान रहता हूँ| हमारे यहाँ एक कहावत है, 'नामी बनिया के झाइंट बिकाय’' (प्रसिद्ध दुकानदार का प्यूबिक हेयर भी बिकता है)| यह किताब इसी कहावत को चरितार्थत करती है| अगर सिर्फ किताब के राइटर का नाम बदल दिया जाए, तो कोई 10 रूपये में इसे नहीं खरीदेगा| इस किताब से सिर्फ यह सवित होता है कि अगर आपके पास पैसा है तो आप कुछ भी उलूल-जुलूल लिख कर, किताब छपवा सकते हैं, और लेखक बन सकते हैं| ‘पैसा’ और प्रसिद्धि से लोग इतने ज्यदा प्रभावित हैं कि यदि पैसा वाला आदमी अपना ‘...द’ भी बेचे तो लोग उसे इत्र मान कर खरीदेंगे|
पूरी किताब को बिना किसी परेशानी 100 पेज में लिखा जा सकता था| लेकिन सिर्फ ज्यादा कीमत वसूलने के लिए, जबरदस्ती 235 पेज को इंक से पोता गया है| हर पांच पेज के बाद छठा पेज कोरा है| जगह-जगह निरर्थक तस्वीरें बनी हुई है| 

6 comments:

  1. I have also the same opinion....

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  2. यह ग्लैमर और पैसे का ही कमाल है कि आप जैसा शख्स उजुल फुजूल की किताबों पर वक़्त जाया कर रहा है...

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    1. सही कहा आपने पैसा बोलता है :)

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  3. वैसे मुझे नहीं लगता कि आप इस किताब पर अपना ज्यादा वक्त जाया किये होंगे...

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    1. ऐसा हो सकता है, क्योंकि कई बार मैं बिना पढ़े ही तब्सिरा लिख देता हूँ... इसकी संभावना है...

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