किताब का नाम- द आउटसाइडर, लेखक- अल्बर्ट
कामू
“My mother died today. Or maybe yesterday, I don’t
know.”- The outsider
अलबर्ट कामू पिछली सदी के उन चंद ख़तरनाक लोगों में से
एक हैं, जिनको पढ़ना और
जिनसे बचना दोनों ही बहुत ज़रूरी है| लेकिन समस्या यह है कि यह दो काम एक साथ संभव नहीं है| अगर आप इनको पढ़ते
हैं, तो इन से बचना
क़रीब-क़रीब असंभव है| क़रीब-क़रीब इसलिए
कह रहा हूँ, क्योंकि कुछ हैं
जिनकी बुद्धि भैंस की चमड़ी जितनी मोटी होती है, (ये भेंस की चमड़ी वाली बात बचपन में माँ मेरे लिए
इस्तेमाल में लाती थी) ऐसी मोटी बुद्धि वाले लोग, पढ़कर भी बच सकते हैं| बांकी जो थोड़े भी समझदार और चेतनावान हैं, उन के लिए बचना
बहुत ही मुश्किल है|
“Mama often said that no one is ever really entirely
unhappy.”
कामू की ‘द आउटसाइडर’ 120 पेज की एक बहुत ही पतली किताब है| किताब को बड़े
आराम से एक दिन में पढ़ा जा सकता है, कहनी बिलकुल सरल और सीधी है| लेकिन इसको पचाने
में आपको सालों लग सकते हैं| और अगर ग़लती से आप इसे नहीं पचा पाए, तो पहले यह नासूर
बनेगा, फिर नासूर से
कर्क रोग, और अंत में आप
केंसर से मर जाएंगे| तो, इसे पढ़ने से पहले
अच्छे से सोच विचार कर लेना जरूरी है| नहीं तो आपकी स्थिति सांप छुछुंदर जैसी हो जाएगी| अगर पचा लिया, तो आप एक ऐसे
व्यक्ति हो जाएंगे, जिस तरह के
व्यक्तियों से आपके माता-पिता बचपन में आपको हमेशा दूर रहने के लिए कहते थे| और अगर नहीं पचा
पाए, तो कैंसर जैसी
असाध्य बीमारी से आपकी मौत होगी|
कामू का मर्सो बहुत ही ख़तरनाक आदमी है| सामने माँ की लाश
पड़ी है, और वह रोने-धोने
के बजाए सिगरेट फूंक रहा है| 24 घंटे भी माँ को जलाए नहीं हुए हैं, और वह स्विमिंग
पूल में अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ रंगरलियां मना रहा है, “Gentlemen of the Jury, just
after his mother’s death, this man went swimming, began a casual affair and
went to see a comedy. I have nothing more to say.” लेकिन इस सब का
यह अर्थ नहीं है कि मर्सो अपनी माँ से प्यार नहीं करता है| नहीं वह अपनी माँ
से उतना ही प्यार करता है, जितना कोई भी
बेटा अपनी माँ से कर सकता है, “I undoubtedly loved Mama very much, but that didn’t mean anything. Every
normal person sometimes wishes the people they love would die.” मर्सो वहां से
बोल रहा हैं, जिसको जुंग ने ‘स्टोरहाउस ऑफ़
कांशसनेस’ कहा है| यह वह जगह है, जहाँ आप दिन तो
क्या रात सपने में भी जाना पसंद नहीं करते हैं|
“Everything is true and nothing is true.”
‘द आउटसाइडर’ कामू की कालजयी रचना है| कामू का मर्सो
मेरे लिए बिलकुल भी ‘अजनबी’ नहीं है| साहित्य संसार
में, कामू की ‘द
स्ट्रेंजर/आउटसाइडर’ पढ़ने से पहले, मर्सो के अलावा
दो और लोगों को, मैं बहुत पहले से
जानता था, जो मर्सो की तरह
आउटसाइडर हैं| एक तुर्गनेव का
बज़ारोव और दूसरा दोस्तोवस्की का रस्कोलनिकोव | तुर्गनेव का ‘बज़ारोव’ मेरे सबसे अधिक पसंदीदा साहित्य चरित्रों में से एक है| रस्कोलनिकोव को
में समझ सकता हूँ, इन फैक्ट उसे
अच्छे से समझता हूँ, फिर भी उसमे कुछ
ऐसा है जो मेरे लिए दस्तरस नहीं है| मेरी पूरी सहानुभूति उसके साथ नहीं है| बज़ारोव के साथ
मेरी समानुभूति है, उसके साथ मैं 100 फीसदी राज़ी हूँ|
निज़ी ज़िन्दगी में भी, मैं मर्सो और बज़ारोव से बहुत ही अच्छे से परिचित हूँ| लेकिन आपके लिए
किताब 10000 वोल्ट का झटका हो
सकता है| इसीलिए जरा संभल
कर| ‘तब्सिरा’ पढ़ कर झट से
आर्डर मत दे दीजिएगा| इस किताब को पढ़ने
के बाद कई लोगों का दिमागी संतुलन बिगड़ चुका है| एक महानुभाव, जिनका नाम कामेल दाउद है, का दिमाग किताब
पढ़ कर इतना सटक गया कि इन्होने इस किताब के खिलाफ एक पूरी किताब लिख दी| इसलिए ज़रा संभल
कर, बहुत कठिन है डगर
पनघट की| किताब का हैंगओवर
महीनो तक आप पर हावी रह सकता है| एक बार दोस्तोवस्की की ‘ब्रदर्स करमाज़ोव’ पढ़ते-पढ़ते मुझे ही ऐसा लगने लगा था कि कहीं मैं ही
पागल ना हो जाऊं(क्या पता हो ही गया होऊं)| दोस्तोवस्की और
कामू एक ही स्कूल से आते हैं| अतः दोनों, आपको सच में पागल कर सकते हैं| कामू एक बहुत ही
ख़तरनाक दार्शनिक हैं, उनका दर्शन ईश्वर
के इर्दगिर्द नहीं घूमता है| ईश्वर इत्यादि के बकवास में वे ज्यादा उत्सुक नहीं है| उनके लिए जीवन
में एक ही मूलभूत समस्या है, “आत्महत्या करें या ना करें?” इसीलिए अगर आपको जीवन पर पकड़ बनाए रखनी हो, तो कामू से थोड़ी
दूरी बना कर रखिये|
“I have never truly been able to regret anything. I was
always preoccupied by what was about to happen, either today or tomorrow.”
अगर आपको अपनी घर-गृहस्थी, और रोजगार ठीक
ढंग से चलाना है, और किसी जोम्बी
की तरह घिसट-घिसट कर मर जाना है, तो मैं यहाँ आपको उन लोगों के नामों की लिस्ट दे रहा हूँ, जिनसे मिलना तो
दूर, आपको उनके आसपास
भी नहीं फटकना चाहिए| दोस्तोवस्की(दइडियट और ब्रदर्स करमाज़ोव और नोट्स फॉर्म अंडरग्राउंड), तुर्गनेव (फादर्स
एंड संस), कामू (द
आउटसाइडर), हक्सले (आइलैंड), एलन वाट्स (दी
बुक), टॉलस्टॉय
(रेज़रेक्शन) और काफ्का (कहानियां), ये वो सात लोग हैं, जिन से आपको हमेशा बच कर रहना चाहिए| अगर ग़लती से भी
कभी आप इनके चपेटे में आ गए, तो फिर धोबी के गधे की तरह, आप ना तो घर के रह जाएंगे, और ना ही घाट के| इस लिस्ट में दो
और नाम हैं| ये दोनों भस्मासुर
भारतीय हैं| मैंने जानबूझ कर
इन दोनों महाभूपों का नाम लिस्ट में शामिल नहीं किया है| क्योंकि, ये दोनों लॉरेन
हार्डी, उन लोगों के लिए
हैं, जो अपना आमूल
विनाश यानि सर्वनाश चाहते हैं| ये दोनों उनके लिए हैं, जिनके इंतजार में कबीर बीच गाँव में खड़े होकर कह रहे
हैं, “कबीरा खड़ा बाजार
में लिए लुकठी हाथ जो घर बारे आपना चले हमारे साथ”| ये उन फ़कीरों के लिए हैं, जिनकी घर फूंकने
की तैयारी है, “आई मौज फकीर की, दिया झोपड़ा
फूंक"| जो एक बार घर छोड़
कर निकला तो फिर मुड़ कर नहीं देखा| ये उनके लिए लिए हैं जिनके कुल में अब कोई रोने धोने
के लिए भी नहीं बचा, “राम विमुख अस हाल
तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा”
“Even in the dock, it is always interesting to hear
people talk about you.” -The outsider
अगर आप ख़ुद का नामोंनिशान हमेशा-हमेशा के लिए मिटाने
के लिए आमादा हों, तो मैं आपको उनका
नाम बता सकता हूँ| इन फैक्ट अभी ही
बता देता हूँ, शुभ कार्य में
विलंब क्यों? एक हैं मैरून
माफ़िया के सरगना धार्मिक आतंकवादी ‘ओशो’, और दूसरे हैं
धर्म के ब्रह्मास्त्र जिद्दु कृष्णमूर्ति| ये दोनों वो तीर्थ हैं, जहाँ से नाहा कर कोई वापिस नहीं लौटता| ये दोनों काल के
गाल हैं, एक बार अगर आप
इनमे प्रवेश करते हैं, तो फिर ‘come back’ नहीं है| ये दोनों
महामृत्यु हैं|
ये दोनों बड़े ही अनूठे ढंग से आपका क़त्ल करेंगे| एक पहले लतीफ़ा और
लच्छेदार बातें सुना कर आपको हँसाएगा, गुदगुदी लगेगा, हँसाते-हंसाते आपको बेसुध कर देगा| जब आप
हँसते-हँसते बेहोश हो कर गिर जाएँगे, तब तर्क की दोधारी तलवार से आप का गला रेत दिया जाएगा| एक बूंद भी शोणित
नहीं बहेगा और आप का काम तमाम हो जाएगा| दूसरा, आपको लतीफ़ा तो नहीं सुनाएगा, लेकिन बात ही
इनती अनोखी बोलेगा कि सुन कर आपको हंसी आएगी| लेकिन क्या आपको हंसने दिया जाएगा? जी नहीं आपको
हंसने नहीं दिया जाएगा| “Sir, please
don’t laugh, don’t waste your energy.” ऐसा बोल कर आपको चुप कर दिया जाएगा| लेकिन कितनी देर
कोई हंसी रोक कर बैठ सकता है? किसी भी चीज़ की एक सीमा होती है| आप का दम घुटने लगेगा, आपके प्राण शरीर छोड़ने के लिए छटपटाएंगे| जल्दी ही आप उस
पॉइंट पर पहुँच जाएँगे, जहाँ एक और ‘लतीफ़े जैसी बात’ अगर आपको सुनाई
गई, और हंसने नहीं
दिया गया, तो तक्षण आप पूरे
हो जाएँगे| लेकिन आप उस क्षण
इस घुटन भरी जिंदगी से मर जाना ज्यादा उचित समझेंगे| आपको अपने मरने का ग़म नहीं होगा| आपको बेसब्री से इंतजार कर रहे होंगे एक और ‘लतीफ़े जैसी बात’ की..., आप चाह रहे होंगे हैं कि एक और लतीफ़ा आपको सुनाया जाए...., और आपको इस घुटन
से..., इस देह की बोझ से मुक्ति
मिल जाए| ताकि आप स्वर्ग में
खुल कर हंस सके| लेकिन तभी कहानी
में ट्विस्ट की तरह आपसे एक यक्ष प्रश्न पूछा जाएगा| प्रश्न सुनकर आप हंसी भूल जाएँगे| अब दांत निपोड़ने
के बजाए, आप अपना सिर खुजाने लगेंगे| आपको सिर खुजाते देख कर, आपसे एक और यक्ष
प्रश्न पूछा जाएगा| फिर आपको दाढ़ी
में खुजली होने लगेगी| आपको अपनी दाढ़ी खुजाता देख
कर, आप से तीसरा सवाल
पूछा जाएगा| अब आपको पीठ में
खुजली होने लगेगी| फिर चौथा प्रश्न, फिर पांचवा, फिर छठा, एक के बाद एक
प्रश्नों की बमबारी शुरू हो जाएगी| अब, आपके पूरे शरीर में खुजली का भयंकर उत्पात मचेगा| सिर से लेकर पैर
तक कोई ऐसा अंग नहीं बचेगा जहाँ आपको खुजली नहीं हो रही होगी| एक ऐसी घनघोर खुजली मचेगी, जिसकी आपने कभी सपनो में भी परिकल्पना नहीं की होगी| काश उस वक़्त आपके पास दस हाथ होते! लेकिन यह तो ‘काश’ है, हकीकत यह है कि
आपके पास सिर्फ दो ही हाथ है| और दो कमज़ोर हाथों से आप कितना खुजा सकते हैं....? आपको अफ़सोस होगा
कि आज ही आपने नाखून क्यूँ कटा था? आप सोचेंगे, 'आज अगर नाख़ून बड़े होते तो अच्छे से खुजा पता'| किसी से आप मदद
भी नहीं मांग पाएँगे, क्योंकि आपका
पड़ोसी भी आपनी खुजली शांत करने में व्यस्त होगा| पहले से पता होता, तो घर से खुजली की कोई दवाई, लेकर आये होते, लेकिन अब इस वक्त
इस निर्जन में क्या उपाय करे कोई? अरे पहले पता होता तो आप आते ही नहीं, लेकिन अब क्या हो
सकता है? खुजली का भयंकर
उत्पात परमाणु के विस्फोट की तरह एक से तीन, तीन से 9 और फिर 9 से अनंत की तरफ बढ़ता ही चला जाएगा| अंत में कुछ
खुलजी और कुछ खुलजी को ना खुजा पाने की खुजली की वजह से, मौके पर ही आप
टें बोल देंगे| और किसी को कानो-कान ख़बर नहीं होगी कि आप खुजली से मरे| "वो क़त्ल कर के मुझे हर किसी से पूछते हैं, ये काम किस ने किया है, ये काम किस का था " | फिर घटेगा चमत्कारों का चमत्कार, मर कर आप पाएँगे कि जीतेजी जिन यक्ष प्रश्नों को सुन कर सिर खुजा रहे थे, मरते ही उन सारे प्रश्नों का आपको हल मिल गया| लेकिन अब इस ज्ञान का क्या फायदा? क्या बरसा जब कृषि सुखाने?
“She murmured that I was very strange, that she
undoubtedly loved me for that very reason, but that one day she might find me
repulsive, for the some reason.” –The outsider
इन सात और दो नौ, लोगों से अगर आप ख़ुद को बचा लेते हैं, तो आप हमेशा सेफ
है, फिर कोई
माई-का-लाल आपको आपके नर्क से खीच कर बाहर नहीं ला सकता है| फिर आराम से
नौकरी कीजिये, पैसा कमाइए, घर बनाइये, नाम कमाइये, जो मन में आये वो
कीजिये, जिंदगी अपनी है, मौज जीते से रहिए| बस इन ‘कुल-सोधनों’ से बचिए| अगर आपको रस्ते
में सांप और इन दोनों में कोई एक साथ दिख जाएँ, तो पहले इनको मारिये, सांप का काटा तो बच भी सकता है, लेकिन इनका काटा
हुआ, बिना पानी मांगे
ही दम तोड़ देता है| जैसे शंकर ने कहा था ‘भज गोविन्दं
मूढ़मते’, उसी तरह मैं आप
से कहना चाहता हूँ, ‘बच इन दोनों से
मूढ़मते, बच| इनसे अगर जान बच
गई, तो जीने के लाखो
उपाय कर लेंगे| फिर तो, सौ-सौ जूते खाएँगे, मगर तमाशा घुस कर देखेंगे|
“The first few days she was at the old people’s home, she
often cried. But that was because her routine had changed. After a few months,
she would have cried if she’d been taken out of the home. For the same reason.”
– The outsider

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