किताब का नाम- मिसेज
फनीबोन्स, लेखक- ट्विंकल खन्ना
"Life is full
of contradictions. We Crave security and independence in equal measures."
किताब से संबंधित कुछ
तथ्यों पर एक नज़र डालें:-
1. पेंगुइन
प्रकाशन से छपी, 235 पृष्ट की इस किताब का मूल्य
299 रुपया है|
2. पूरी किताब को एक बैठक
यानि तीन घंटे में समाप्त किया जा सकता है| (इस बात से आप अंदाज़ा लगा
सकते हैं कि प्रति पृष्ट 1.11 पैसे की कीमत वाली इस किताब में क्या लिखा होगा|)
3. 2016 में इस किताब को ‘रेमंड
क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है, और यह ‘ए नेशनल बेस्टसेलर’
है|
4. लेखिका, प्रसिद्ध
अभिनेता राजेश खन्ना की सुपुत्री, और अक्षय कुमार की पत्नी हैं|
5. किताब पढ़ने के बाद
निर्देशक करन जोहर ने कहा कि “I love Twinkle Khanna’s brilliant
observations and self-deprecating humor- she is the discovery of the decade.”
अब, किताब से संबंधित कुछ
सत्यों पर एक नज़र डालें:-
1.
यह किताब अभिनेता अक्षय कुमार के प्रसंशकों को ध्यान में लिख कर लिखी
गई, है, अर्थात उन्हें बहुत पसंद आएगी|
2.
यह किताब उन लोगो के लिए है, जनके पास अफ़रात फ़ालतू का
पैसा, और फ़ालतू का समय है|
3.
पूरे किताब में मुश्किल से तीन बार आपको हंसी आएगी|
अब विवेचन:-
किताब
में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिस के बारे में बात की जाए,
या फिर जिसकी वजह से किताब पढ़ी जाए| लेकिन फिर भी मैं आपसे निवेदन
करूँगा कि एक बार आप इस किताब को जरूर पढ़िए| क्योंकि बिना पढ़े आप यह
कैसे जानेंगे कि बिना सिर-पैर की किताबें कैसी होती है? सार को सार की भांति समझने
के लिए असार का ज्ञान होना जरूरी है|
बाबा तुलसीदास ने ठीक कहा
है कि ‘समरथ को नहीं दोष गुसाईं'| पैसे के दम पर, कैसे लोगों को उल्लू बनाया जाता है,
और कैसे
लोग उल्लू बन जाते हैं, मैं यह देख कर हैरान रहता
हूँ| हमारे यहाँ एक कहावत है, 'नामी बनिया के झाइंट बिकाय’' (प्रसिद्ध दुकानदार का प्यूबिक
हेयर भी बिकता है)| यह किताब इसी कहावत को चरितार्थत करती है| अगर सिर्फ किताब के
राइटर का नाम बदल दिया जाए, तो कोई 10 रूपये में इसे नहीं खरीदेगा| इस किताब से सिर्फ
यह सवित होता है कि अगर आपके पास पैसा है तो आप कुछ भी उलूल-जुलूल लिख कर, किताब
छपवा सकते हैं, और लेखक बन सकते हैं| ‘पैसा’ और प्रसिद्धि से लोग इतने ज्यदा
प्रभावित हैं कि यदि पैसा वाला आदमी अपना ‘...द’ भी बेचे तो लोग उसे इत्र मान कर खरीदेंगे|
पूरी किताब को बिना किसी परेशानी
100 पेज में लिखा जा सकता था| लेकिन सिर्फ ज्यादा कीमत वसूलने के लिए, जबरदस्ती 235
पेज को इंक से पोता गया है| हर पांच पेज के बाद छठा पेज कोरा है| जगह-जगह निरर्थक
तस्वीरें बनी हुई है|

I have also the same opinion....
ReplyDeleteअल्लाह !
Deleteयह ग्लैमर और पैसे का ही कमाल है कि आप जैसा शख्स उजुल फुजूल की किताबों पर वक़्त जाया कर रहा है...
ReplyDeleteसही कहा आपने पैसा बोलता है :)
Deleteवैसे मुझे नहीं लगता कि आप इस किताब पर अपना ज्यादा वक्त जाया किये होंगे...
ReplyDeleteऐसा हो सकता है, क्योंकि कई बार मैं बिना पढ़े ही तब्सिरा लिख देता हूँ... इसकी संभावना है...
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