आज, महिला दिवस के पावन अवसर पर, मैं, इक्क्यु केंशो तजु, इश्क़ और इबादत की प्रतिमूर्ति मीरा, भक्ति और श्रधा की पराकाष्ठा सहजो और दया बाई, ममता की देवी मरियम, मेगदालिन, महामाया, एनी बेसेंट, क्रांतिकारी स्त्री लल्ला, मैडम ब्लावट्स्की, ओशो की छाया माँ विवेक, बुद्ध की धर्म पत्नी यशोधरा, मौन की मंदिर संत भूरीबाई, सुकरात की पत्नी जेंथीप, बौध भिक्षुणी आम्रपाली, बुद्धि की मीनार-ए-आजम गार्गी, सहनशीलता की उतुंग शिखर पर बैठी तीन चोटी की स्त्री सीता, द्रोपदी और अहिल्या, पैगम्बर मोहम्मद की पहली पत्नी हजरत ख़दीजा, जुदास की वंशज माँ आनंद शीला, गाँधी की पत्नी बा कस्तूरबा, कृष्णमूर्ति की अनाम प्रेमिका, ब्रह्मवादिनी माँ मदालसा, पहली औरत देवी हव्वा, मेरी वकील माँ धर्मज्योति, तीर्थंकर मल्लीबाई, और अंत में वो तमाम औरत जिन्होंने मनुष्य की चेतना को नई उंचाई दी है, उन सबके चरणों में श्रधा और प्रेम का सुमन अर्पित करता हूँ.
चित्र साभार-गूगल
https://www.facebook.com/dhyan.viram/videos/989450467874392/

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