Day-3 Running in the Evening
और प्यार का भूत उतर गया........
पता नहीं अब ऐसा होता है या नहीं. लेकिन उन दिनों हमने किसी का भी नंबर या पता हासिल करने का नयाब तरीका ढूंढ निकाला था. MTNL के कस्टमर केयर में कॉल करके पता बताने पर वे लोग उस पते पर लगा MTNL का फ़ोन नंबर बता देते थे. और यदि आपके पास फोन नंबर है तो वो आपको पता बता देते थे. इसी तरीके से मैंने मीनाक्षी के घर का नंबर निकाल लिया था. दो चार दिन तक उस नंबर को मोबाइल के सेव करके मैं इतराता रहा, लेकिन कॉल करने की हिम्मत नहीं हुई. उन दिनों प्यार के मामले में मेरी हालत उन कुत्तों की तरह थी जो कार के पीछे बिना यह जाने भागते हैं कि अगर कार उन्हें मिल गया तो करेंगे क्या? “शादी-मुझे करनी नहीं है, सेक्स-बाप रे! ऐसा मैं सोच भी कैसे सकता हूँ,.
एक महीना तक हमारा बस देखा-देखी चलता रहा. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि आगे और क्या करना है. “हो तो गया वह मुझे देखती है, मैं उसे देखता हूँ, अब और इससे आगे क्या चाहिए...?” लेकिन मीनाक्षी को इससे आगे भी कुछ चाहिए था, एक दिन अपने छत के रेलिंग के एकदम पास आ कर, गर्दन उपर करके मुझसे बोली, “तुम कुछ बोलते क्यों नहीं हो...?”. भाई साहब यकीन मानिये मेरी तो एकदम से सिटीपिटी गुम हो गई. मैं नीचे उसकी ओर देखता है, गले से थूक सटका, लाख कोशिश के बावजूद भी मेरे अन्दर से एक शब्द भी नहीं निकला. थोड़ी देर तक मेरी ओर देखते रहने के बाद वह वहां से कुछ बुदबुदा कर चली गई, शायद मुझे गाली देकर चली गई.
रात मुझे तेज़ बुखार हो गया, पूरी रात नींद नहीं आई. अगले दिन फिर से हमेशा की तरह शाम का इंतजार करने लगा. लेकिन आज उसके सामने जाने की मेरी हिम्मत नहीं हुई. पता नहीं किस चीज़ से डर गया था मैं, अपने कमरे में दुबका बैठा रहा. अगले दो दिन तक यही किस्सा चला. तीसरे दिन सुबह मेरे ऊपर किसी जादूई शक्ति का इल्हाम हुआ और मैंने तय किया कि आज मैं उससे बात करूँगा. और उसे दिखा दूंगा कि मैं कोई डरपोक और बुजदिल नहीं हूँ. मजीद इंतजार के बाद वह वक़्त आया जब वह क्लास लेने के लिए अपने घर से निकली. मैं उसके पीछे हो लिया. पांच मिनट बाद हम मेन रोड पर आ गए. उसने अभी तक एक बार भी मुझे पीछे मुड़ कर नहीं देखा था. शायद उसे इस बात का इल्म नहीं था कि मैं उसका पीछा कर रहा हूँ या उसके पीछे चल रहा हूँ.
चित्र साभार-गूगल
“Excuse me!”, मैंने पीछे से आवाज़ लगाईं. उसने पलट कर देखा. “क्या है..” उसने हडबडी दिखाते हुए कहा. “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है..’’, तेज़ कदमो से पीछे चलते हुए मैंने कहा. वह अचानक तेज-तेज चलने लगी थी. “जो भी कहना है जल्दी कहो..” बिना मेरी तरफ देखे बोली और आगे बढ़ती रही. इससे पहले कि मैं उसे कह पता कि मैं तुझसे प्यार करता हूँ, तुझसे दोस्ती करना चाहता हूँ. एक कार ठीक मेरे बगल में आ कर रुकी. शीशा खुला, ड्राइविंग सीट पर बैठे लड़के ने मुझसे पूछा, “क्या है भाई, क्यों परेशान कर रहा है उसे, कहाँ रहता है तूं....?” मुझे काटो तो खून नहीं. “यहीं लालबाग में रहता हूँ...” मैंने हकलाते हुए गलत पता बताया. और तेज़ी से वहां से भागा...बिलकुल वैसे ही जैसे आजकल सुबह खेत में भागता हूँ. बीस मिनट तक भगने के बाद एक घर के नीचे बैठ गया. आधा घंटा तक चिंतन-मनन करने के बाद सीधा नाई के पास गया और अपने अर्जुनरामपाल कट बाल को फौजी कट करवा कर घर लौट आया. बाल के साथ सिर से प्यार का भूत भी उतर गया. दो चार दिन बाद घर खाली कर के दूसरे मोहल्ले में चला गया.

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