Thursday, 27 August 2020

रात का रिपोर्टर

 अब हम तुम्हे नहीं पढ़ा सकेंगे| जानती हो, आस-पड़ोस के लोग क्या कहते हैं ? कहते हैं, लड़का रिपोर्टिंग के लिए लिए बाहर रहता है और बूढ़ा पढ़ाने के बहाने अपनी जवान बहू के साथ........

----------------------------------------------------------------------------
एक बूढ़ा बालक, लओत्सो नाम का यही अर्थ होता है चीनी भाषा में| कहते हैं लओत्सो जब पैदा हुआ तो वह 80 साल का था| कुछ लोग इस बात को प्रतीक की तरह लेते है, मतलब उसकी बौद्धिक उम्र उतनी थी| मेरी दृष्टि में लओत्सो ओरिएंट का असली हिमालय है, एक ऐसा हिमालय जिस पर पश्चिम का कोई हिलेरी कभी नहीं चढ़ सकता है| लओत्सो ज्ञान के गौरीशंकर हैं|
लओत्सो का सारा ज्ञान उनकी छोटी-सी किताब 'ताओ ते चिंग' में समाहित है| मुश्किल से 30 पेज की यह किताब अपने में अस्तित्व के सभी राज़ को समेटे हुए है| 'ताओ ते चिंग' के बहुत से सूत्रों में से एक सूत्र अस्तित्व के शुरुआत के बारे में हैं| उसी शुरुआत के बारे में, जिसके सम्बन्ध में अरविन्द सावित्री में लिखते हैं- It was the hour before the Gods awake. जी, यह उस क्षण की बात है जब ईश्वर अपनी नींद से जागा नहीं था| ग़ालिब कहते हैं, जब कुछ नहीं था तो ख़ुदा था, लेकिन लओत्सो ने कहा है कि जब कुछ भी नहीं था तब कोहरा था, धुंध था| ख़ुदा के होने के लिए बन्दे का होना ज़रूरी है, बिना बन्दे के ख़ुदा नहीं हो सकता है| इसलिए ग़ालिब की बातों में बहुत सचाई नहीं है| अरविन्द भी सत्य के बहुत करीब हैं, लेकिन उनकी भी ऊँगली ठीक सत्य पर नहीं है| ईश्वर और नींद ये सब द्वैत की बातें है|
लओत्सो की व्यख्या एकदम सटीक है- जब कुछ भी नहीं था तब धुंध था| रहस्यदर्शी के लिए अंग्रेज़ी में हम मिस्टिक शब्द का उपयोग करते हैं, यह शब्द भी मिस्ट यानि धुंध से बना है| संत वह जो धुंध को देखता है| हमें सब साफ़ दिखता है, हमें पता है कि क्या गलत है और क्या सही, पाप और पुण्य की परिभाषा हमें याद है| लेकिन संत को कुछ भी साफ़ नहीं होता है, उसके लिए पाप-पुण्य, सुख-दुःख, धर्म-अधर्म और अच्छा-बुरा इस सबमे कोई भेद नहीं होता है| उसको कुछ भी साफ़ नहीं होता है| सिर्फ मूर्खों को सब चीज़ें साफ़ दिखाई देती है, संत को नहीं, संत जहाँ से देखता है वहां सिर्फ घाना कोहरा है|
निर्मल वर्मा को पढ़ना धुंध को टटोलना है| निर्मल की दुनिया में कुछ भी साफ़ नहीं होता है, न तो वहां दिन का अलोक है, और न ही रात का अँधेरा, क्योंकि अभ्यास से कोई अँधेरे में भी दिन की तरह देख सकता है| चोर देख लेते हैं, शिकारी देख लेते हैं, आप भी देख सकते हैं| लेकिन कोहरे में देखने का कोई अभ्यास नहीं हो सकता है| आप कितनी ही कोशिश क्यूं न कर लें, कोहरे में कुछ भी साफ़ नहीं होता|
"ज़रा सोचिये, हम कैसे टाइम में जी रहे हैं, जहाँ आदमी अपनी औरत के सामने नंगा नहीं हो सकता है!" - निर्मल वर्मा (रात का रिपोर्टर)
यही सच है हमारे समय का, हमारे ही समय का क्यों यह हमेशा का सच है| कवि गंग को अकबर ने हाथी से कुचलवा दिया था, क्यों? क्योंकि उन्होंने लिखा 'जिसको हरि से प्रीत नहीं आस करे अकबर की' | हमें भी कुचल दिया गया है, हाथी से| यह और बात ही कि इस बार हाथी चीन से आया था|
लओत्सो कहते हैं, "The supreme rulers are hardly known by their subjects. The lesser are loved and praised. The even lesser are feared. The least are despised" (राजा वही महान है जिसकी उपस्थिति का बोध प्रजा को न के बराबर हो, समान्य राजा से लोग प्रेम करते हैं, उनकी प्रशंसा करते हैं, और घटिया रजा से प्रजा डरती है)
इस कसौटी पर आज के राजाओं को कहाँ रखते हैं? आज यह सवाल पूछना बहुत ज़रूरी है| आज ही क्यों यह सवाल हमेशा ज़रूरी था, और आगे भी रहेगा|
'ताओ ते चिंग' में ही लओत्सो का एक और वचन है, "The more laws and commands there are, the more thieves and robbers there will be. (अगर अपराध और अपराधी को बढ़ाना है तो नियम और कानून को बढ़ा दो|)
यही हो रहा है पूरी दुनिया में, रोज़ नए-नए नियमों को लोगों पर थोपा जाता है, कभी घर से बाहर मत निकलो, कभी बिना मुंह ढके बाहर मत निकलो, मत कहो को आसमां में छेद यह किसी व्यक्तिगत निंदा हो सकती है|
इसीलिए रिशी का बॉस, राय साहब, उससे आत्मकथा लिखने के लिए कहते हैं, क्योंकि समाज के सत्य को बिना सत्ता की नज़रों में आए लोगों तक पहुँचाने का एक मात्र उपाय है आत्माकथा| लेकिन वह दिन दूर नहीं जब दुनिया की सरकारें आत्मकथा लिखने पर बैन लगा देगी|
फिर रिशी के पिता को अपनी बहू से कहना पड़ेगा, "अब हम तुम्हे नहीं पढ़ा सकेंगे| जानती हो, आस-पड़ोस के लोग क्या कहते हैं ? कहते हैं, लड़का रिपोर्टिंग के लिए लिए बाहर रहता है और बूढ़ा पढ़ाने के बहाने अपनी जवान बहू के साथ........
-इक्क्यु केंशो तजु (२६, अगस्त २०२०)


No comments:

Post a Comment

जा जा रे अपने मंदिरवा

दोपहर के साढ़े तीन बजने वाले हैं। फ़िल्टर कॉफ़ी के साथ अपने राइटिंग टेबल पर आ गया हूँ। लैपटॉप के स्पीकर पर रवि शंकर सितार बजा रहे हैं। १९५८ ...