Sunday, 20 May 2018

'लस्ट फॉर लाइफ़' (विवेचन)

किताब का नाम- लस्ट फॉर लाइफ (जीवनी) , लेखक-इर्विंग स्टोन
लब्धप्रतिष्ठित डच चित्रकार विन्सेंट वान गोघ के जीवन पर आधारित यह किताब उनके लिए है जो जीवन के मशाल को दोनों तरफ से जला कर, उसे एक त्वरा व तीव्रता के साथ जीना चाहते हैं| मरे-मरे-से, बुझे-बुझे-से, और घिसट-घिसट कर जीने वालों को वान गोघ समझ में नहीं आएँगे|
"How stupid for me to remain alive if I can't paint the way I want to paint."
वान गोघ के लिये जीवन का अर्थ इस बात में नहीं है कि आप इस पृथ्वी पर कितनी देर तक रहते हैं| जिन्दा लाश की तरह जीते चले जाने में वान गोघ उत्सुक नहीं हैं| वान गोघ के लिए जीवन की सार्थकता इस बात में है कि जो पल आपको मिला है, उसे आप कितनी समग्रता से जीते हैं| अगर वान गोघ पेंटर नहीं होते तो, वे ऋषि होते, या फिर इसको ऐसे कहिए यदि उपनिषद का कोई ऋषि कभी चित्रकार हो जाए तो वो वान गोघ होगा| एक मौके पर वान गोघ अपने मित्र गौगुइं से कहते है,
"The sole unity in life is the unity of rhythm. A rhythm to which we all dance; men, apples, ravines, ploughed fields, carts among the corn, houses, horses, and the sun. The stuff that is in you, Gauguin, will pound through a grape tomorrow because you and a grape are one. When I paint a peasant labouring in the field, I want people to feel the peasant flowing down into the soil, just as the corn does, and the soil flowing up into the peasant. I want them to feel the sun pouring into the peasant, into the field, into corn, the plough, and the horses, just as they all pour back into the sun. When you begin to feel the universal rhythm in which everything on earth moves, you begin to understand life. That alone is God."
यह निश्चित ही किसी साधारण चित्रकार की दृष्टि नहीं है| LSD लेने के बाद अल्डोउस हक्सले ने वान गोग को याद करते हुए कहा था, "जैसा मुझे अभी दिख रहा है, शायद वान गोग को ऐसा हमेशा दिखता था|" जिस आँख से वान गोग ने इस संसार को देखा था, वह वही आँख है जिसे योग 'तीसरी आँख' कहता है, और उसी आँख को ग़ालिब ने दीदा-ए-बीना कहा है-"कतरे में दिजला दिखाई ना दे और जुज़्व में कुल. खेल लड़कों का हुआ, दीदा-ऐ-बीना ना हुआ"| वान गोघ को दीदा-ए-बीना उपलब्ध था| वान गोग अद्वितीय है| जैसे तारों से आच्छादित आकाश में ध्रुव तारा सब से अलग हैं, वैसे ही वान गोग हैं, सब से अलग, अनूठे, अनुपम|

मुझे लस्ट फॉर लाइफकी बहुत सी बातें पसंद हैं| जब वान गोग कि माँ उनसे कहती है, “You mean you want to make your drawing right so that portraits will be good enough to sell?’’ इस पर वान गोग जवाब देते हैं, “I have to make my drawing right so that my drawing will be right”, ऐसे ही एक बात-चीत में वान गोग के पिता उनसे फायदा-नुक्सान और पैसे कि बात करते हैं, इस पर वे अपने पिता से कहते हैं, “I thought we were discussing good and bad art”. फिर एक जगह जब उनके एक पेंटिंग में उनके घर वाले यह तय नहीं कर पाते हैं कि किसान कहाँ
खत्म होते हैं खेत कहाँ शुरू होती तो वान गोग कहते हैं, “There should be no strict line between, they are really two kinds of earth, pouring into each other, belonging to each other; two forms of the same matter, indistinguishable in essence.”
इस किताब को पढ़कर वान गोघ से ज्यादा मुझे थिओ, वान गोघ के भाई, से प्यार हो गया| इसका कारण यह है कि मेरे जीवन में भी एक थिओ है, नहीं एक कहना सही नहीं होगा-तीन थिओ है| वान गोघ निश्चित ही अनूठे थे| ऋषि थे| लेकिन थिओ के बिना कुछ भी संभव नहीं हो पाता| वान गोघ अगर वान गोघ बन पाए तो सिर्फ थिओ की वजह से| किताब पढ़ने के बाद से अपने थिओ के प्रति अथाह प्रेम से भर गया हूँ|
एक मौके पर एक आर्ट डीलर वान गोघ से उनका मजाक उड़ाते हुए पूछता है, "Do you call yourself an artist?", वान गोघ जवाब देते हैं, "Yes"| इस पर आर्ट डीलर चिढ़ कर उनसे कहता है, "How absurd. You have never sold a picture in your life." इस पर वान गोघ उसे प्रेम से समझाते हुए कहते हैं,
"Is that what being an artist means--selling? I thought it meant one who was always seeking without absolutely finding. I thought it means the contrary from 'I know it, I have found it.' When I say I am an artist, I only mean 'I am seeking, I am striving, I am in it with all my heart."
जब तक वान गोघ जिन्दा रहे, तब तक उनकी एक भी पेंटिंग नहीं बिकी| बिकनी भी नहीं चाहिए थी, अगर बिक जाती तो वान गोघ मुर्ख सवित होते और यह दुनिया होशियार| इस दुनिया में सिर्फ दो ही लोग बिकते हैं एक मुर्ख और दूसरा मुर्दा| मनुष्यता अभी इतनी प्रौढ़ नहीं हुई है कि यह जीवत बुद्धो को पहचान सके और उनको पूजे|

8 comments:

  1. What a master piece of writing...

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  2. Kela ki nazar se dunia kis kis tarah se dikhti hai?

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    1. कला की दृष्टि से दुनिया एक काव्य की तरह दिखता है... संभवतः रवीन्द्रनाथ की किसी कविता की तरह....

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  3. केला की नज़र से दुनिया अकेला दिखती है...

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