आपने कभी सोचा कि हम जम्हाई क्यों लेते हैं, और क्या आप जानते हैं कि हंसने का क्या प्रयोजन है?
हँसना और जम्हाई लेना बहुत गहरे में एक दूसरे से सम्बंधित है। योग के अनुसार हमारे शरीर में सात चक्र हैं, और हर चक्र की अपनी उपयोगिता है और विशेषता है, लेकिन यहाँ हम चक्रों से नहीं उलझेंगे।
चित्र-साभार गूगल
हम हंसी और जम्हाई की बात कर रहे थे, अगर आप विज्ञान से जम्हाई और हंसी के बारे में पूछेंगे तो उनके पास कोई तर्कसंगत जवाब नहीं है। एक योगी के सिवाय और कोई भी आपको हंसी और जम्हाई का राज़ नहीं बता सकता है।
जम्हाई एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा आप अपने एक चक्र से दूसरे चक्र तक उर्जा को पहुंचाते है। मतलब ज्यादा उर्जा वाले चक्र से आप कम उर्जा वाले चक्र को जम्हाई के द्वारा उर्जा देते हैं।
और हंसी के द्वारा आप चक्रों पर जरूरत से ज्यादा संग्रहित उर्जा को बाहर फेंकते हैं। अगर ज्यादा उर्जा संग्रहित हो जाए, और उसे हंसी के द्वारा बाहर न फेका जाए, तो वह उर्जा नकारात्मक उर्जा में परिवर्तित हो जाती है और आप अवसाद में चले जाते हैं। क्योंकि गति उर्जा का स्वाभाव है, आप उसे एक अवस्था में नहीं रोक सकते हैं।
इसका मतलब यह हुआ कि आप न हंसने के कारण दुखी हो जाते हैं। साधारणतया हमें लगता है कि लोग दुखी हैं, इसीलिए नहीं हँसते हैं, लेकिन हकीकत कुछ उल्टा ही है, 'न हंसने के कारण लोग दुखी हैं'।
हमारे 90% बीमारी और मानसिक रोग का कारण हमारे जिंदगी से हंसी का गायब हो जाना है।
हंसने को अपने जीवन का अनिवार्य अंग बनाइए, और गंभीरता का त्याग कीजिए। अपने उर्जा का विधायक उपयोग कीजिए। गंभीरता एक रोग, सिवाय मनुष्य के पूरे अस्तित्व में और कोई गंभीर नहीं है। गंभीर होने की मूढ़ता सिर्फ तथाकथित समझदार लोगों में पाई जाती है। ऐसी समझदारी का क्या लाभ जिससे जीवन में मनहूसियत आती हो?

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