प्रश्न - 24 घंटे आनंदित रहने का क्या मार्ग है ?
Ikkyu- सबसे पहले आपके भीतर 24 घंटे आनंदित रहने का जो लोभ है, उसे छोड़ना होगा..। दूसरी बात, आनंद का अपना कोई अनुभव नहीं होता है| सुख का अनुभव होता है, दुःख का भी अनुभव होता है, लेकिन आनंद का कोई अनुभव नहीं होता है, क्योंकि अनुभव के लिए ‘दो’ का होना ज़रूरी है। सुख के पीछे दुःख छिपा होता है, इसीलिए सुख का अनुभव होता है। इसी तरह दुःख के पीछे सुख छिपा होता है। अगर भीतर बिल्कुल ही सुख न हो तो आपको दुःख का पता नहीं चलेगा। तो, इस बात को बहुत ही अच्छे से समझ लीजिए कि अनुभव हमेशा विपरीत का होता है। साथ ही एक और बात गहरे उतार लीजिए,’कोई भी अनुभव आध्यात्मिक नहीं होता है’। कैसा भी अनुभव क्यों न हो सब अनुभव मन के हैं।
आनंद का अनुभव नहीं हो सकता है क्योंकि आनंद आपका होना है। आनंद चेतना का स्वभाव है। इसीलिए, जब तक चेतना सुख और दुःख के अनुभव में उलझी रहती है, वह अपने स्वभाव से वंचित रहती है। सुख में सुखी होना और दुःख में दुखी होना छोड़ दीजिए, फिर जो रह जाएगा वही अनन्द है।
आनंद का अनुभव नहीं हो सकता है क्योंकि आनंद आपका होना है। आनंद चेतना का स्वभाव है। इसीलिए, जब तक चेतना सुख और दुःख के अनुभव में उलझी रहती है, वह अपने स्वभाव से वंचित रहती है। सुख में सुखी होना और दुःख में दुखी होना छोड़ दीजिए, फिर जो रह जाएगा वही अनन्द है।
प्रश्न- जीवन को किस प्रकार जीना चाहिए ?
इक्क्यू- जागकर जीना चाहिए...दो दृष्टिकोण मैं आपको देता हूँ, जो भी सही लगे उसे चुन लीजिए। दोनों का परिणाम एक जैसा है।
पहला- चीज़ों और लोगों को ऐसे देखिये जैसे आप उन्हें पहली बार देख रहे हैं। हर दिन को ऐसे जीना शुरू कीजिये जैसे यह आपके जीवन का पहला दिन है।
दूसरा- चीज़ों और लोगों को ऐसे देखना शुरू कर दीजिए जैसे कि आप उन्हें आख़री बार देख रहे हैं। हर दिन को अपने जीवन का आख़री दिन समझिए।
दोनों ही दृष्टिकोण का एक ही लक्ष्य है-अतीत और भविष्य से मुक्ति..। जो भी आपको जमे उसे चुन लीजिए और कोई तीन महीने इस प्रयोग को कीजिए।
प्रश्न- आपका मूल संदेश क्या है ?
मेरा कोई संदेश नहीं है..। मैं कोई पैग़म्बर (पैग़ाम/मेसेज लाने वाला) नहीं हूँ..! संदेश लाना डाकिये का काम है। मैं कोई डाकिया-वग़ैरह नहीं हूँ। डाकिया एक जगह की ख़बर को दूसरी जगह पहुँचता है। यह बिचौलिये काम है। मुझे ऐसा काम पसंद नहीं है।
मैं अपने से ऊपर किसी को नहीं मानता हूँ, और ना ही कोई मुझसे नीचे है। फिर किसका संदेश किस तक पहुँचाऊँ?? मैं स्वयं संदेश हूँ।और यही मैं आपसे भी कहना चाहता हूँ, “अप्प दीपो भव:”
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