Saturday, 3 February 2018

तुम कौन हो?


यह तो नहीं पता लेकिन कुछ बातें जो पता है, वो आपको बता  देता हूँ.
ओशो मेरे गुरु तथा कृष्णमूर्ति मेरे पथप्रदर्शक हैं. जॉर्ज गुरजिएफ से मेरा अंतरंग संबंध है. लाओत्से से मैंने जीवन के गूढ़तम रहस्यों को जाना है. मीरा से मैंने नाचना सीखा है. कबीर को मैंने फ़ुर्सत में गुनगुनाया है. जीसस से मैं परिचित हूँ. बुद्ध से प्रेम है. शिव को पूजता हूँ. नानक को पढ़ा है. दरिया से कुछ शब्द उधार लिये हैं. सहजो के साथ मस्ती में झुमा हूँ. पलटू से प्रेम का पाठ सीखा है. लल्ला से पागलपन सिखा है. एलन वॉट्स से गहरी दोस्ती है. रमन से आत्मअनुसन्धान का पाठ पढ़ा है. महावीर से ब्रह्मचर्य पर चर्चा की है. कृष्ण को जन्म से जानता हूँ. मोहम्मद को राह चलते हुए कई बार सलाम किया है. एकहार्ट टोले को देखकर मुस्कुराता हूँ. मूजी से मौन संवाद किया है. नीत्शे को समझता हूँ. मिरदाद से मिला हूँ. ग़ालिब को तकिये के नीचे रखकर सोता हूँ. अहमद फ़राज़ को दिल का दर्द सुनाया है. गुलज़ार के साथ चाय पी है. मीर को जिया हूँ. मुल्लानसरुद्दीन के साथ हँसा हूँ. रूमी से एक बार आँसू पोछने के लिए रूमाल लिया था. आम्रपाली के घर एक रात ठहरना चाहता हूँ, हरमनहेस को तर्पण देता हूँ. इर्विंग स्टोन को चाय पर आमंत्रित करना चाहता हूँ. रेणु के साथ एक बार बिहार घूमना चाहता हूँ. अमृता प्रीतम से प्रेम पत्र लिखवाना चाहता हूँ. इस्मत आपा से एक बार हाथ मिलाना चाहता हूँ. फ्रायड को एक बार सक्रीय ध्यान करते हुए देखना चाहता हूँ, सत्यजीत रे के साथ बैठकर एक फिल्म देखना चाहता हूँ. बच्चन की मधुशाला में एक बार शराब पी थी. गोपालदास नीरज के साथ रोया हूँ. मंटो से एक बार मिलना चाहता हूँ. रवींद्रनाथ के पैर छूना चाहता हूँ. टिच नहत हनह के साथ सत्यसंग करना चाहता हूँ. रिन्झाई के साथ चांदनी रात में नौकाविहार करना चाहता हूँ. मैडम बलवात्सकी को डाँटना चाहता हूँ. टोलस्टोय को धन्यवाद देना चाहता हूँ. इवान तुर्गनेव के कंधे पर हाथ रखकर थोड़ी दूर चलना चाहता हूँ. दोस्तोवसकी की पीठ ठोकना चाहता हूँ. ख़लील जिबरान से जलता हूँ. मंसूर की तरह मरना चाहता हूँ. विमलकृति से प्रभावित हूँ. मखलीगोशाल को मिस करता हूँ. विवेकानंद से लगाव है. रामकृष्ण के चरणों में श्रध्दा का सुमन अर्पित करता हूँ. संसार से ऊब गया हूँ. सन्यास को त्याग दिया है. ध्यान नहीं करता हूँ. भक्ति जमता नहीं है. प्रेम अपने बस की नहीं है. तर्क करने में कुशल हूँ. लेकिन गुरु नहीं बनना है (हालाँकि इच्छा बहुत है). बुद्धत्व के बारे में बुद्ध से भी ज़्यादा पता है लेकिन फिर भी बुद्धू हूँ. और क्या जानना है आपको?

Friday, 2 February 2018

बुद्धत्व की घोषणा


एक दोस्त कल वहत्सप पर मुझसे कह रहा था, “तुम अपने बुद्धत्व की घोषणा क्यों नहीं कर देते हो? ”अब क्या बोलूँ उसको....,

भाई मेरे, दो-चार ज्ञान की और अच्छी-अच्छी बातें कर लेने से कोई बुद्ध नहीं हो जाता है. तुम भी दर्शन और मनोविज्ञान की चार किताबें पढ़ लो, मेरे जैसे हो जाओगे. फिर चाहो तो तुम अपने ज्ञान की घोषणा कर देना..

लेकिन एक बात जो मुझे समझ नहीं आती है,वह यह कि यदि कोई व्यक्ति अपने बुद्धत्व की घोषणा करता है, तो मैं देखता हूँ कि लोग उसके पीछे पड़ जाते हैं यह समझाने के लिए कि वह कोई बुद्ध नहीं है, बस उसे भ्रम हो गया है. और उन्ही लोगों को मैं देखता हूँ किसी से ये कहते हुए कि ‘भाई आप तो बुद्ध हैं, आपको ज्ञान घट गया, मुझसे मत छुपाईये, मैं सब समझता हूँ.!’ कमाल है!
क्या बुद्धत्व से ऊपर की भी कोई ऐसी अवस्था है जहाँ आदमी को यह पता चल जाता है कि कौन सच में बुद्ध है और कौन नक़ली है?

जा जा रे अपने मंदिरवा

दोपहर के साढ़े तीन बजने वाले हैं। फ़िल्टर कॉफ़ी के साथ अपने राइटिंग टेबल पर आ गया हूँ। लैपटॉप के स्पीकर पर रवि शंकर सितार बजा रहे हैं। १९५८ ...